Monday, December 31, 2012

अलविदा 2012

अबे 2012!
तेरे जैसा साल न आए दोबारा।
तूने तो पूरा देश ही निपटा मारा
सबसे पहले तो छीना
कुश्ती का सितारा
एक्टिंग का किंग
यानि दारा सिंह
अभी दारा की याद को भूले भी नहीं थे अख़बार
तब तक हमें अलविदा कह गए राजेश खन्ना
यानि पहले सुपरस्टार
फिर लगते रहे एक के बाद एक घाव
मुम्बई में विलासराव
उसके बाद ए के हंगल
फिर बेस्ट डायरेक्टर यश अंकल
मन करता था बीच में ही कर दें तुझसे कट्टी
तब तक रोड एक्सिडेंट में मारे गए
कॉमेडी किंग जसपाल भट्टी
फिर तेरी भेंट चढ़ा बाल ठाकरे जैसा लाल
फिर इंद्र कुमार गुजराल
तू साले साल था, या काल
दिसम्बर में भी तूने छोड़ा नहीं अपना गुर
छीन लिए पंडित रविशंकर
ग़ायब हो गए सितारों से सुर
इतने पर भी भरा नहीं तेरा कोष
दिल्ली में वहशियों की भेंट चढ़ गई
एक तेईस साल की निर्दोष

इसके अलावा भी
कुछ अच्छा नहीं रहा तेरा बीहेव
तूने ही लील लिए संघ के सुदर्शन
और आस्था के जय गुरुदेव
जो तुझसे बचे
उनकी भी हालत अच्छी नहीं है भाई
राम ही जाने कैसे होगी इसकी भरपाई

सचिन ने वन डे में जाना छोड़ दिया
लता मंगेशकर ने गाना छोड़ दिया
रतन टाटा ने कमाना छोड़ दिया
अन्ना ने आवाज़ उठाना छोड़ दिया
और सातवें सिलैण्डर ने रसोई में आना छोड़ दिया

वाह रे काले कालखण्ड
इतिहास निर्धारित करेगा तेरा दण्ड
अच्छा हुआ तू बीत गया
तुझे अंदाज़ा नहीं है
कि तेरे रहते कितना कुछ रीत गया
काश ऐसा साल
फिर कभी जीवन में न आए
जाते-जाते तू हमसे ले ले
फाइनल गुड बाय!

✍️ चिराग़ जैन

Monday, December 17, 2012

पूजा के हक़दार

जिस डाली का काटा जाना आज अखर जाता है तुमको 
उस डाली के कटने से ही कल को तुम फलदार बनोगे 
जिस छैनी के छूने भर से चीख़ निकलती है पत्थर की 
उस छैनी की चोटों से तुम पूजा के हक़दार बनोगे 

अनुभव के दो हाथ समूचे माटी-माटी सन जाएंगे 
तब जाकर मिट्टी के ढेले को किंचित आकार मिलेगा 
मिट्टी से पहले हाथों की भाग्य लकीरें घिस जाएंगी 
तब बर्तन कहला पाने का मिट्टी को अधिकार मिलेगा 
जिन जलते शोलों से तन-मन सब कुछ झुलसेगा भीतर तक 
उनके कारण ही तुम प्यासे ओंठों पर बौछार बनोगे 

गंगा बनकर पुजना है तो, गोमुख से झरना ही होगा 
बूंदों को बारिश बनना है, बादल को मरना ही होगा 
रामशरण स्वीकार नहीं हो, और मुक्ति की इच्छा हो तो 
कंचन मृग का स्वांग रचा कर, सीता को हरना ही होगा 
अपने सारे सुख को अपने हाथों वनवासी कर दोगे 
तब सम्भव है तुम जीते जी धरती पर अवतार बनोगे 

© चिराग़ जैन

Sunday, December 9, 2012

क्या कर लेगा ऊलाला

सौम्य धुनों से क्या जीते रीमिक्सों का गड़बड़झाला
ओरिजनल से पस्त रहेगा, हर नकली-शकली वाला
जब महफ़िल में गुंजित होगी, बच्चन जी की मधुशाला
क्या कर लेंगी शीला-मुन्नी, क्या कर लेगा ऊलाला

© चिराग़ जैन