नज़र की शोख़ियों को, मस्तियों को चूम आता हूँ
जे़ह्न में तैरती कुछ कश्तियों को चूम आता हूँ
ठहाकों के मुहल्ले में सजी महफ़िल से उठकर मैं
हसीं ग़ज़लों की सादा बस्तियों को चूम आता हूँ
✍️ चिराग़ जैन
गत दो दशक से मेरी लेखनी विविध विधाओं में सृजन कर रही है। अपने लिखे को व्यवस्थित रूप से सहेजने की बेचैनी ही इस ब्लाॅग की आधारशिला है। समसामयिक विषयों पर की गई टिप्पणी से लेकर पौराणिक संदर्भों तक की गई समस्त रचनाएँ इस ब्लाॅग पर उपलब्ध हो रही हैं। मैं अनवरत अपनी डायरियाँ खंगालते हुए इस ब्लाॅग पर अपनी प्रत्येक रचना प्रकाशित करने हेतु प्रयासरत हूँ। आपकी प्रतिक्रिया मेरा पाथेय है।
Monday, August 6, 2012
Sunday, July 29, 2012
खारिज
एक ही पल में
उभर आए
कई सारे शिक़वे
ढेर सारे गिले
उभर आए
कई सारे शिक़वे
ढेर सारे गिले
और फिर
अगले ही पल
मैंने ख़ुद-ब-ख़ुद
लाजवाब कर दिया उन्हें
अपने मन की अदालत में
....ऐसा नहीं था
कि सचमुच बेबुनियाद थीं
मेरी शिकायतें
अगले ही पल
मैंने ख़ुद-ब-ख़ुद
लाजवाब कर दिया उन्हें
अपने मन की अदालत में
....ऐसा नहीं था
कि सचमुच बेबुनियाद थीं
मेरी शिकायतें
बल्कि बात दरअसल ये थी
कि अदालत दिल की थी
और
दिल तुम्हारा...!
✍️ चिराग़ जैन
कि अदालत दिल की थी
और
दिल तुम्हारा...!
✍️ चिराग़ जैन
Sunday, July 8, 2012
पुरवा
एक बादल ने सरे-शाम भिगोई पुरवा
सुब्ह फूलों से लिपट फूट के रोई पुरवा
उसने ओढ़ा हुआ होगा कोई ग़म का बादल
यूँ ही मदमस्त नहीं होती है कोई पुरवा
हाय ये शहर बहुत रूखा हुआ जाता है
अबकी गाँवों ने क्या सरसों नहीं बोई पुरवा
तेरे दामन से क्यों उठती है महक ममता की
छू के आई है क्या अम्मा की रसोई पुरवा
आज उन लोगों के आंगन में बसी है पछुआ
जिनके पुरखों ने कलेजे में संजोई पुरवा
✍️ चिराग़ जैन
सुब्ह फूलों से लिपट फूट के रोई पुरवा
उसने ओढ़ा हुआ होगा कोई ग़म का बादल
यूँ ही मदमस्त नहीं होती है कोई पुरवा
हाय ये शहर बहुत रूखा हुआ जाता है
अबकी गाँवों ने क्या सरसों नहीं बोई पुरवा
तेरे दामन से क्यों उठती है महक ममता की
छू के आई है क्या अम्मा की रसोई पुरवा
आज उन लोगों के आंगन में बसी है पछुआ
जिनके पुरखों ने कलेजे में संजोई पुरवा
✍️ चिराग़ जैन
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Wednesday, June 20, 2012
रौशनी
जब कोई शख़्स
कोशिश करता है
सूरज से
आँख मिलाने की
तो केवल
आँखें ही नहीं चुंधियाती
त्यौरियाँ भी
पड़ जाती हैं
माथे पर!
✍️ चिराग़ जैन
कोशिश करता है
सूरज से
आँख मिलाने की
तो केवल
आँखें ही नहीं चुंधियाती
त्यौरियाँ भी
पड़ जाती हैं
माथे पर!
✍️ चिराग़ जैन
Saturday, June 9, 2012
करीने की बात
मरने की बात हो चुकी जीने की बात कर
गाली-गलौज छोड़, करीने की बात कर
सीने के नाप से ये सियासत न चलेगी
अब आम आदमी के पसीने की बात कर
✍️ चिराग़ जैन
गाली-गलौज छोड़, करीने की बात कर
सीने के नाप से ये सियासत न चलेगी
अब आम आदमी के पसीने की बात कर
✍️ चिराग़ जैन
Friday, June 8, 2012
प्रमाण
इससे पहले कि लोग तुम्हें कंधा दें,
…तुम उनको अपने जीवित होने का प्रमाण दे दो।
✍️ चिराग़ जैन
…तुम उनको अपने जीवित होने का प्रमाण दे दो।
✍️ चिराग़ जैन
Thursday, May 24, 2012
मैं लाचार हूँ
घटक दल बोलता है बस यही हर बार मैं लाचार हूं
मेरी तो बात सुनती ही नहीं सरकार मैं लाचार हूं
मेरी बीवी ने पाले हैं गली में यार, मैं लाचार हूं
मेरी बीवी चलाती है मेरा परिवार मैं लाचार हूं
मेरी तो बात सुनती ही नहीं सरकार मैं लाचार हूं
मेरी बीवी ने पाले हैं गली में यार, मैं लाचार हूं
मेरी बीवी चलाती है मेरा परिवार मैं लाचार हूं
© चिराग़ जैन
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Sunday, April 29, 2012
बेमानी
बहुत दिन से इंतज़ार था
एक ख़ास यात्रा का
मुश्क़िल से हाथ आया
यात्रा का अवसर
घर से निकला
उत्साह से आपूरित
कुछ ही दूर पहुँचा
कि मोबाइल पर
एस एम एस आया-
”सुनो! जल्दी आना...“
...और मुझे बेमानी लगने लगी
हर उपलब्धि।
✍️ चिराग़ जैन
एक ख़ास यात्रा का
मुश्क़िल से हाथ आया
यात्रा का अवसर
घर से निकला
उत्साह से आपूरित
कुछ ही दूर पहुँचा
कि मोबाइल पर
एस एम एस आया-
”सुनो! जल्दी आना...“
...और मुझे बेमानी लगने लगी
हर उपलब्धि।
✍️ चिराग़ जैन
Monday, April 16, 2012
जीना मुहाल है
तुझको सबसे मलाल है, सच्ची
यार तू भी कमाल है, सच्ची
इश्क़ वालों का हाल मत पूछो
बस कि जीना मुहाल है सच्ची
उम्र भर मुंतज़िर रही नज़रें
एक पल का सवाल है सच्ची
जाने कब कैसा रूप धर लेगी
ज़िन्दगानी छिनाल है सच्ची
मुझसे ज़्यादा मुझे तबाह करे
इतनी किसकी मज़ाल है सच्ची
✍️ चिराग़ जैन
यार तू भी कमाल है, सच्ची
इश्क़ वालों का हाल मत पूछो
बस कि जीना मुहाल है सच्ची
उम्र भर मुंतज़िर रही नज़रें
एक पल का सवाल है सच्ची
जाने कब कैसा रूप धर लेगी
ज़िन्दगानी छिनाल है सच्ची
मुझसे ज़्यादा मुझे तबाह करे
इतनी किसकी मज़ाल है सच्ची
✍️ चिराग़ जैन
Friday, April 6, 2012
वंदना के गीत
जश्न में खोने से पहले दो घड़ी ख़ुद को जगा लें
उत्सवों की देहरी पर देवताओं को मना लें
मुस्कुराहट दिव्य हो जाएगी गर दो पल ठहर कर
उल्लसित होने से पहले वंदना के गीत गा लें
✍️ चिराग़ जैन
उत्सवों की देहरी पर देवताओं को मना लें
मुस्कुराहट दिव्य हो जाएगी गर दो पल ठहर कर
उल्लसित होने से पहले वंदना के गीत गा लें
✍️ चिराग़ जैन
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