सोच में मेरी ढल के देख
मुझसे तेज़ निकल के देख
अपनी सोच बदल के देख
हाला तेरे अंतस् की
यहाँ-वहाँ न छलके देख
अगुआई क्या होती है
मेरे आगे चल के देख
फिर से तेरी बात चली
फिर से आँसू ढलके देख
राम लिखा और तैर गए
पत्थर होकर हल्के देख
पायल मौन चली आई
होंठ खुले साँकल के देख
याद, मुहब्बत, ख़्वाब, ख़याल
कितने रूप ख़लल के देख
शब्द बदलना छोड़ ‘चिराग़’
अब तू अर्थ बदल के देख
अपनी सोच बदल के देख
हाला तेरे अंतस् की
यहाँ-वहाँ न छलके देख
अगुआई क्या होती है
मेरे आगे चल के देख
फिर से तेरी बात चली
फिर से आँसू ढलके देख
राम लिखा और तैर गए
पत्थर होकर हल्के देख
पायल मौन चली आई
होंठ खुले साँकल के देख
याद, मुहब्बत, ख़्वाब, ख़याल
कितने रूप ख़लल के देख
शब्द बदलना छोड़ ‘चिराग़’
अब तू अर्थ बदल के देख
✍️ चिराग़ जैन
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